"साहित्य-सेवा"
अगर लिखना ना आ सके
तो कोई शर्म की बात नहीं,
लेकिन किसी के लिखे को
अपना दिखा कर मत लूटो वाहवाही...,
नहीं जानते नाम लेखक का
तो अज्ञात ही लिख दो,
पर किसी के लिखे के नीचे
अपना नाम मत दो...
इतनी गरिमा उस लेखक की
और अपनी रख लो..
बहुत है तुम्हारी इतनी
साहित्य-सेवा भी..,
प्रांजल,
24/10/19,
4.25P