संसार भर मे माता पिता के प्रति आदर सम्मान महत्व और आज्ञा पालन के लिये हमें अनेको धार्मिक और समाजिक उपदेश देखने को मिलते हैँ
जो ज्ञानियों और विद्ववानो द्वारा उस समय लिखें और बताए गये थे जब पड़े लिखें व्यक्तियों की संख्या संसार मे गिनी चुनी थी
उस समय अनपढ़ होने के कारण कभी कभी भूल से कुछ अभागे माता पिता का नीरआदर कर जाते थे
तब कोई ज्ञानी पड़ा लिखा व्यक्ति उस व्यक्ति और उसके आस पास के लोगो को उचित अनुचित का ज्ञान देता गलती करने वाले को धिकारता माता पिता के आज्ञाकारीयों की सम्मान पूर्वक प्रशंसा करता लोगो का सद्भावनाओ के प्रति उत्साह बढ़ाता
वही आज के दौर मैं बड़े दुख की बात हैँ के संसार जैसे जैसे ज्ञान के प्रकाश से जग मग हो रहा हैँ वैसे वैसे लोग अपनी शालीनता, गुण,सम्मान और माता पिता से प्रेम जैसे सभी भावनाओं से हीन होते जा रहे हैँ
स्थिति इतनी भयंकर हो गई हैँ के अधिकतर आज के पड़े लिखें लोग ही आदर्शहीन पाए जाते हैँ
कई बार अनपढ़ गवार को आप किसी पड़े लिखें व्यक्ति से अधिक सभ्य सामाजिक और संस्कारी पाओगे
अब भला वो ज्ञान किस काम का जिसको बोझ की भांति उठाए जाओ किन्तु उसका उपयोग ना करो उसके द्वारा विचार विमर्श ना करो बस स्वार्थ के बल पर निर्णय लो ऐसे व्यक्ति को ना तो जीवन मे शांति प्राप्त होती हैँ ना ही परलोक मे स्थान मिलता हैँ
एक अनपढ़ कुछ अनुचित करें तो उसके पास एक उचित कारण होता हैँ के वो अज्ञानी हैँ
परन्तु एक पड़े लिखें बुद्धिमान व्यक्ति से हम कैसे आशा कर सकते हैँ के वो अज्ञानीयों के तरह व्यवहार विचार करें
ये दुर्भाग्य नहीं तो और क्या हैँ यदि मनुष्य इस बात को भली भांति जान ले के कर्म ही हमारा अंतिम फल तय करेगा कर्म ही हमारा भविष्य बनाएगा तो वो कोई भी अनुचित कार्य करने की क्षमता खो देगा और स्वयं के लोक परलोक को भस्म ना होने देगा
मगर ऐसा नहीं हो रहा मनुष्य कुछ समय पाप कर सुख भोगने के पश्चात् खुद को कर्ममुक्त समझने लगता हैँ
और अन्य लोग उस नीच को दुष्कर्म करने पर सुख भोगते देख कर कर्म से विश्वास उठा लेते हैँ सोचते हैँ अगर उस को कुछ नहीं हुआ तो हम भी बच जायेंगे
उनके लिये कर्म जैसी बातें केवल ढकोसला बाजी होती हैँ कर्म का वास्तम मे कोई अस्तित्व नहीं ऐसा सोचने मे भी रत्ती भर संकोच नहीं करते
मगर कर्म का नियम और पहचान ही ये हैँ के वो सही समय पर ही नीति =अनीती हित =अहित लाभ =हानि उपहार या दंड देता हैँ उचित समय से पूर्व या पश्चात कर्म का कोई महत्व नहीं