बारिश जो हुई तो
बूँदें जो छुई तो
लगा कि तू आ गया
मैंने जिंदगी से कहा
झूठा ही सही चेहरे पे
एक मुस्कुराहट दे दे
क्योंकि उसे मेरे गालों पर
पड़ने वाले गड्ढे से इश्क़ है
वो जब जब मुझे मुस्कुराता
देखता है3 तब तब सुकून से
उसमें डूब जाता है
और उतने ही इत्मीनान से
कह जाता है कि
"तेरी मुस्कुराहट से मुझे जो
तसल्ली मिलती है
उसे मैं शब्दों में
बयां नहीं कर पाऊँगा।"
ऐ बारिश उम्र के उस दौर में
हम मिले जहाँ सिर्फ और सिर्फ
दोस्ती ही एक बँधन है जो
ताउम्र हमें बाँधे रखेगा
तो ऐ बारिश इतनी इनायत
हम पर कर देना कि
हर साल तू अपना सोलहवाँ
सावन वाला जलवा
हम पर बिखेरना ताकि
हम ना भी मिल पाएँ तो
तेरी बूँदों की छुअन से
एक-दूसरे के स्पर्श का
अहसास दिल को
सुकून से रूबरू करा दे।
मनु प्रभाकर ??????
(स्वरचित)