जिंदगी का फलसफा ,इतना ही ,
कुछ जजबात , साँस की डोर में;
कुचे, से कब्र तक सफर सुहाना
मौत महेबुबा मिलन के होश में ;
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कैद लम्हा ए हँसी , नजाकत में,
भीगा सा जजबात शबनमी। में ;
फुलके रिस्तेने पुकारा है , यकीनन,
आसमाँ ए दिल परिन्दे , महोबत में;
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