सारे ज़ख़्म अब मीठे लागें
कोई मलम भला अब क्या लागे
दर्द ही सोहे, मोहे जो भी होवे
टूटे ना टूटे ना,
सूझे नहीं, बूझे कैसे, जियरा पहेली
मिलना लिखा न लिखा, पढ़ ले हथेली
पढ़ ली हथेली पिया, दर्द सहेली पिया
गम का है गम अब ना हमें
रंग ये लगा को ऐसो, रंगरेज को भी जैसो
रंग देवे अपने रंग में