सुदंर कविता ..
विषय .चाहत ..
फिर तुम्हारा प्यार पाने का हुआ हैं मन ।
फिर तुम्हारे पास आने का हुआ है मन ।।
तुम बिन सुना लगता है दिल का आंगन ।
फिर तुम्हारी जुल्फों मे बैठने का हुआ है मन ।।
तुम्हारी दूरियों ने स्मृति रेखाएं उतारी है मन में ।
फिर तुम्हारी चाहत ने अपनी बांहें पसारी हैं ।।
फिर तुम्हें जाकर मनाने को हुआ है मन ।
चल पड़े है पांव व्याकुल से तुम्हारे शहर ।।
फिर तुम्हारा प्यार पाने को हुआ है मन ।
तुम्हारी कजरारी आँखों में डूबने हुआ है मन ।।
दिखता है मुझे मेरा धर तुम्हारे बिन सुना सा ।
लग रहा है मेरा अकेला अस्तित्व संकट सा ।।
फिर तुम्हारे आंचल में सिर झुकाने को हुआ है मन ।
फिर तुम्हारे चांद जैसे मुखडे के दीदार करने का हुआ है मन ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला ,हाल .अमदाबाद ।