Hindi Quote in Gandhigiri by Hitesh Rathod

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बात उन दिनों की है जब मैं एक सरकारी इकाई मे काम करता था जो की सफाइ कामदार व उनके आश्रितो के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान हेतु काम काम करती थी, जिसमे सफाइ कामदार व उनके आश्रितो को कुुछ आर्थिक सहायता प्रदान की जाती थी।

एक दिन मे शाम को मैं दफतर से घर वापस आया। कुछ देर बाद कोई दो-तीन शख्स मेरे घर आये, जिसको मैं जानता नहि था। वो लोग अाए और मुझ से कहने लगे कि सर आपने बहुत अच्छा किया जो हमारा लोन पास किया। हमे आज पांच लाख का चेक मिल गया है। सर, आपका बहुत बहुत धन्यवाद। एसा कह मेरे हाथ मे एक कवर थमाने के लिए उन्होने हाथ आगे बढाये, मैने पूछा इसमे क्या है? वो लोग कहने लगे सर, इसमे कुछ रूपये है। आप रख लिजीए। मैने कहा कि, देखो भाईयों मैने जो भी किया वो मेरा फर्ज़ था जिसके लिए सरकार मुझे तनख्वाह देती है, मैने कोइ उपकार नहि किया। मैने तो सिर्फ मेरा फर्ज़ अदा किया और आपको आपका हक दीलाया है। कृपया ये कवर अपने पास ही रखे। उन लोगो ने रूपये लेने के लिए खूब बहस की पर मैने उस कवर को हाथ नहि लगाया। अंततः वो जानेे के लिए नीकले तब मैने कहा आप घर आये है तो कृपया चाय पीकर ही जाए। मेरे कहने पर वो सब चाय पीकर विदा हुए।

Hindi Gandhigiri by Hitesh Rathod : 111262817

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