शाम का सूरज ढलते ही ! बैठ जाते थे वो पुराने दोस्त !
रोज का हाल बया कर ! कुछ भूली बिसरी यादो को ताज़ा करने !
मगर आज कल ये कहा होता है ! इस व्हाट्सप मैसेज के ज़माने में !
बनावटी हेलो, हाय तो बस फॉर्मेलिटी है ! के दोस्ती दीखती रहे !
उसमे वो गले मिल एक दूसरे को हँसते हुए कोसने का मजा कहा !