सुदंर गजल ..
काफिया .आ ।
रदीफ .न कीजिए ।
शब्दों के बाण चलाया न कीजिए ।
दिल बडा नाजुक धायल न कीजिए ।
सभी के प्रति सहानुभूति रखा कीजिए ।
जीव मात्र को परेशां मत कीजिए ।
नैनो के बाण चलाया न कीजिए ।
प्रेम का नाता तोडा न कीजिए ।
मानवता का नाता निभाया कीजिए ।
दानव बन आतंक फैलाया न कीजिए ।
भाईचारे का नाता निभाया कीजिए ।
आपसी रंजीश बढ़ाया न कीजिए ।
परिन्दों को परेशां मत कीजिए ।
उन्मुक्त हवा में उन्हें उडने दीजिए ।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला ,हाल .अमदाबाद ।