Hindi Quote in Poem by Bindiya

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क्यूं नहीं सोचता कोई, आखिर एक इंसान हूँ मैं ,
मर्द हूँ तो क्या हुआ, हरबार हैवान हूँ मैं?

बस कहने को उजालों में जीता हूँ मैं,
अंदर से घुटा और परेशान हूँ मैं,
मर्द हूँ तो क्या हुआ, हरबार हैवान
हूँ मैं?

निकलो तुम खुलेआम, अधनंगे बदन की नुमाईशों में
पर जो देख लूं एक नज़र तुम्हे , तो बस एक शैतान हूँ मैं,
मर्द हूँ तो क्या हुआ हरबार हैवान हूँ मैं?

समाज ने तुम्हे सीता, मुझे शैतान दिखाया है,
रामायण में भी शूपर्णखा और मंथरा थी वो कभी याद नही आया है?
क्या सही में जो हो रहा उसका अकेला कुसूरवार हूँ मैं?
मर्द हूँ तो क्या हुआ हरबार हैवान हूँ मैं?

बराबरी की हो बात , क्यूं नही होता मुकाबला?
भगवान ने हम दोनों को एक सा ही बनाया है ,
फिर भी हर जगह तुमने लेडिज़ फर्स्ट का नियम लगाया है,
हर पुरुष को राक्षस ,औरत को सती नही मानता हूँ मैं,
मर्द हूँ तो क्या हुआ हरबार हैवान हूँ मैं?

Bindiya
@the_ thought_i_thought

Hindi Poem by Bindiya : 111259726
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