" प्रेम "
तू जब मेरे सामने आता है,
मै सारा जमाना भूल जाती हूँ ।
तेरे ख्यालो की खुशबू में ,
हर एक अफसाना भूल जाती हूँ ।
वो तेरा इशारों में इजहार करना ,
तुझमे खो इकरार करना भूल जाती हूँ ।
दिल की धड़कने बढ़ जाती है,
मैं सांसो का लेना भूल जाती हूँ ।
आँखों ही आँखों में बातें करना ,
ओठो से बया करना भूल जाती हूँ ।
स्पर्श को तेरे महसूस करके,
मैं खुद को खुद में भूल जाती हूँ ।
वो लम्हे और ठहरी हुई राते ,
तेरा मुझे छोड़ जाना भूल जाती हूँ ।
कसमें वादे वो लंबी बेचैन राते,
तेरे सपनो में खो मैं मचल जाती हूँ ।
पता नही था प्यार क्या होता है,
मिलकर तुझसे प्रेम को समझ पायी हूँ ।
अब तेरे बिन अधूरी जिंदगी मेरी,
तुझे खोने के ख्याल से सहम जाती हूँ ।
शशि कुशवाहा