आज मौसम-ए-बरसात सुहानी है,
तुमने भी आज पहनी चुनर धानी है।
चुपके से तेरा घर से निकलना और,
तेरी भीगी चुनर की एक कहानी है।
तेरे भीगे हुवे चेहरे पर बालों बिखरना,
दिल से निकली वो यादें भी पुरानी है।
तेरा मासूम मुस्कान मुझे पास बुलाना,
तेरे साथ हुई वो सारी बात ज़ुबानी है।
हकीकत में तुम्हारा कोई वजूद ही नही,
ख्वाबों में "पागल" की ज़िन्दगानी है।
✍?"पागल"✍?