https://youtu.be/zMmYxfK6CXs
1996 उम्र 18 उम्मदो से भरी हसरतें दिलों दिमाग़ में थी पर्दे पर नाचते किरदारों को देख कर मन की सोच में कहानिया कौंधने लगती थी एक अजीब सी बेचैनी और तड़प जो मुझें चैन से बैठने नहीं देती थी... उस वक़्त मेरे मन में कुछ लाइने बार बार कौंध रहीं थी "वक़्त का ये परिंदा उड़ा है कहा.... "
1995 जुलाई को में किसी दूसरे काम से मुंबई गया था अपने मामा के पास रात को मामा के साथ टी सीरीज़ जाना हुआ मामा के गाने की रिकॉर्डिंग थी... हम वहाँ पहुंचे हालांकि मुंबई आना जाना लगा रहता था उस दिन मामा का कोई ट्रिब्यूट सांग अनुराधा जी के साथ रिकॉर्ड होना था.. मै रिकॉर्डिंग चेंबर में बैठा था गुलशन जी आए तो मामा ने मुझें उनसे मिलवाया वो मेरी ज़िन्दगी की पहली गुलशन जी से मुलाक़ात थी..
सुबह 5बजे जब हम घर के लिए लौट रहें थे तो गुलशन जी ने मामा से कहा अपने भांजे को शाम को लेकर आना..
हम शाम को पहुँचे तो गुलशन जी से मेरी बात हुई तब उन्होंने मुझें एक माइथोलोजी फ़िल्म में काम ऑफर किया जिसमे मुझें विष्णु जी का पार्ट करना था... खैर मामा और बड़े भाई ने पापा को समझया तब कही जा कर परमिसन मिली 1996 15 मार्च को मैंने अपना ये गाना लिख कर कम्प्लीट किया जिसमे गीत कर नीरज जी ने काफ़ी सहयोग किया और मामा ने गया इतनाही नहीं गुलशन जी ने इसमें काम भी किया और इसका डायरेक्शन मैंने किया म्यूजिक निखिल विनय का है कल भूषण से मुलाक़ात हुई तो याद ताज़ा हों गई आप भी सुने देखें मेरे इस पहले प्रयास को बाद में कई लोगों ने इसे अपने अपने तरीके से फिल्माया और रिलीज़ किया....