दफना दो हमे की अब तो सांस ली नही जाती..!
एक तरफ़ा ये मोहब्बत हमसे और कि नही जाती..!
जो न सुनना चाहते है हमको उनको अब तो बात की नही जाती...!
इतने तरसे है हम बरसो की बरसात भी अब तो बरसात सी नही आती...!
यू हमसे ये मोहब्बत की कसमें और खाई नही जाती...!
जज्बात इतने बढ़ गए है "गालिब" की उनकी खिलाफत की नही जाती...!
Mr_मरिचि