कवि की कविता का किरदार है औरत
प्रेम का सागर लहलाये वो हैं औरत।
वो नारायणी जीवन दायनी
अमृत लुटाती प्रेरणा दाई हैं औरत।
कपडो मे लिपटी वो ममता की मूरत
रिश्तों में है उसकी जरूरत।
जीवन में उसका कभी अपमान ना करना
तेरे इस वजूद की मान है औरत।
दिव्या राकेश शर्मा।