....मै यादों का
किस्सा खोलूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत
याद आते हैं....
..मै गुजरे पल को सोचूँ
तो, कुछ दोस्त
बहुत याद आते हैं....
..अब जाने कौन सी नगरी में,_
_...आबाद हैं जाकर मुद्दत से....?_..मै देर रात तक जागूँ तो ,
कुछ दोस्त
बहुत याद आते हैं.......कुछ बातें थीं फूलों जैसी,
....कुछ लहजे खुशबू जैसे थे,
....मै शहर-ए-चमन में टहलूँ तो,
....कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
...सबकी जिंदगी बदल गयी,_
_...एक नए सिरे में ढल गयी,_?..किसी को नौकरी से फुरसत नही..._
_...किसी को दोस्तों की जरुरत नही...._?_...सारे यार गुम हो गये हैं..._
...."तू" से "तुम" और "आप" हो गये है......मै गुजरे पल को सोचूँ
तो, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं......धीरे धीरे उम्र कट जाती है..._..जीवन यादों की पुस्तक बन जाती है,_?...कभी किसी की याद बहुत तड़पाती है..._
_और कभी यादों के सहारे ज़िन्दगी कट जाती है ..._?
....किनारो पे सागर के खजाने नहीं आते,
....फिर जीवन में दोस्त पुराने नहीं आते...
_....जी लो इन पलों को हस के दोस्त,_?
_फिर लौट के दोस्ती के जमाने नहीं आते ...._