Hindi Quote in Poem by Krishna Chaturvedi

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अतीत क्या है?
वो जगह जहां कभी सूरज हो के निकला है,
जहां कभी उजाला था,
जहां अनगिनत लड़ाई लड़ी गई है,
खून के, अश्रुवो के दाग़ यहां वहां फैले पड़े है,
सिसकियां भी है, खिलखिलाहट भी है,
कितने ही ढहे हुए इमारत मिलेंगे वहां,
अंधियारों में पड़े हुए,
सूरज वहां से चमक के गुजर चुका है,
वो अब दुबारा वहां से नहीं गुजरेगा,
वहां दुबारा उजाला नहीं होगा,
वो इमारतें जो ढह चुकी है,दुबारा खड़ी नहीं होंगी,
वो तो कतई नहीं, वहां नए बन चुके होंगे,
वो जंग जो लड़ी जा चुकी है,जिसमें हार मिली है,
वो दुबारा जीती नहीं जा सकेगी,
लोग जो छूट गए,वो दुबारा नहीं आयेंगे,
अतीत के दीवार पर सिर पटकना छोड़ क्यों नहीं देते अब?
बनावट के चमक पर कब तक उसमे झाकते रहोगे,
बंजर से पड़े गलियारे में घूमना क्यों नहीं छोड़ देते अब?
क्या मिला है तुम्हे वहां?
सिवाय कष्ट के, पश्चाताप के,ग्लानि के,
उससे बाहर क्यों नहीं निकल जाते अब?
आगे हरियाली है और पीछे बंजर,
आगे फूल है और पीछे धूल,
बंजर से पड़े गलियारे में घूमना क्यों नहीं छोड़ देते अब?

©krishnakatyayan

Hindi Poem by Krishna Chaturvedi : 111249978
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