अगर कभी अपनी किंमत बढाने की जरुरत महसुश होती है, गरीबो की बस्ती मे चला जाता हु।
जब कभी फडफडाता दीया दीखे, ठीकाना मुफलिस का समझ लीझीएगा।
आपके आने कि खुशी मे उजाला किये रखा था,
शायद अब आपकी रुखसत का वखत हो रखा है।
तेरे जाने से लो बुज जाएगी, ये नही कि अंधेरा पसंद हे हमै। पर गरीबो को दो चीजे जलाने की आदत नही,एक तो घासलेट महंगा हो रखा है और जलने के लीए हमारा दील ही काफी है।
-रेरा