हम समझदार हो गए
दुनिया की भीड़ में,
हम कहीं खो गए,
और लोग कहते हैं,
हम समझदार हो गए।
जिम्मेदारीया निभाने मे,
सपने कहीं खो गए,
और लोग कहते हैं,
हम समझदार हो गए।
रिश्ते निभाते - निभाते,
दिल की इच्छाएं खो गए,
और लोग कहते हैं,
हम समझदार हो गए ।
उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित