आईना-1
ये तीन कहानियां ज़रूर पढ़िए?
(1)
सोचिए ज़रा....
आपकी नई-नई शादी हुई और बहुत प्यारी सी लड़की को आपने पत्नी के रूप में पाया। शादी के दो-तीन साल बाद आपकी पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया। बहुत मासूम, बहुत प्यारी बेटी। बिल्कुल परियों की तरह दिखने वाली। जो आपकी जान बन चुकी है। पूरे घर की रौनक है वो और सबकी लाडली।
आप हर वक्त उसे गोद में लेकर घूमते हैं, और ग़ुरूर से सबको बताते हैं कि ये आपकी बेटी है।
धीरे-धीरे आपकी बेटी बड़ी हुई.. उसने चलना सीखा, बोलना सीखा.. उसने आपको पहली बार कहा 'पापा'..
आप खुशी से चहक रहे हैं.. फिर और कुछ साल बीते वो अब स्कूल जाती है। अपनी क्लास में अव्वल आती है। आपको गर्व है कि वो आपकी बेटी है।
वो आसमान को छूना चाहती है, चाहती है कल्पना चावला की तरह दूर आसमान में उड़ना.. चाहती है मैरीकॉम बनना, इंदिरा गांधी की तरह देश को संभालना।
की अचानक उसके पर कतर दिए गए। किसी बहसी दरिंदे ने उसकी अस्मत को कुचल दिया, उसके सपने रौंद दिए.. वो चीख रही है, रो रही है.. उसके पास अब सपने देखने का भी हक़ नहीं। आपको पता है उसकी कोई ग़लती नहीं है। आप जानते हैं वो आज भी आपकी वही प्यारी गुड़िया है.. लेकिन समाज, समाज का क्या.. वो तो उसके ही किरदार पर ऊँगली उठाएगा.. आप उसे गले लगा लेते हैं, कहीं छुपा देना चाहते हैं, चाहते हैं कि उसे टूटे अरमानों के काँच और ना चुभें, लेकिन आप कितनी भी कोशिश कर लें आप कुछ नहीं कर पा रहे हैं.. वो रोती चीखती रहती है आप कुछ नहीं कर पा रहे..
वो अवसाद में जा रही है आप कुछ नहीं कर पा रहे...
वो ज़िन्दगी से हार मानने लगी है, आप सब देख रहे हैं मगर कुछ नहीं कर पा रहे....
क्या हुआ? अब आप उसके किरदार पर, कपड़ों पर सवाल नहीं उठाएंगे..
अचानक आपकी नज़र में उस दरिंदे की मानसिकता खराब हो गयी..
......
क्रमशः
#रूपकीबातें