कहानी
*" श्यामली "*
श्यामली खुद्दार लड़की थी | श्यामली के घर की आर्थिक स्थिति कुछ ठीक न थी इसलिए दूसरे उसे दया की दृष्टि से देखते थे | पर श्यामली को यह पसंद न था | शामली को हर बार गरीब होने का एहसास कराया जाता था |
शामली को यह बिल्कुल पसंद ना था | वह अपने बलबूते पर कुछ ना कुछ करती रहती पर लोग उसकी स्थिति के चलते उस पर दया करते इसलिए शामली लोगों से दूर रहा करती थी क्योंकि उसे दया नहीं चाहिए थी, उसे साथ चाहिए था, अपनापन चाहिए था |
एक बार शामली बीमार होती है | तो उसके सगे वाले उसकी खबर तक नहीं पूछते क्युकि उसे लगता है ऐसे लोगों को कौन पुछे ? वैसे भी इतनी तो कोई उपयोगी, खास तो है नहीं तो क्या पुछना ? ऐसे कर कीसीने उसको पुछा नहीं | कुछ एक थे जो थोड़ी शर्म और दया के चलते पुछने आ गए | श्यामली के मुहबोले भाईने भी खबर न पुछी |
रक्षा बंधन आ रहा था तो श्यामलीने उसके मुंहबोले भाई को राखी न भेजी | अब-तक श्यामली की स्थिति कुछ अच्छी हो गई थी तो उसके मुंहबोले भाई ने लोगो से कहेना शुरू कर दिया कि अब क्यु हमसे संबंध रखें क्युकि अब तो बहोत बड़ी हो चुकी है | जब जरुरत थी तब हमने संभाला आज तेवर ही बदल चुके है | पर श्याभली ने बात अनसुनी कर अपने लक्ष्य को पुरा करने को काम पर जुट गई |...ॐD