ये पलकों की चिलमन झुकते झुकाते,
मेरे दिल की धड़कन रुकते रुकाते,
क्या कह रही है बूझो तो जाने?
तेरे होटों की गरमी, तेरे गालों की लाली,
तेरे माथे की बिंदिया, तेरे कानों की बाली,
क्या कह रही है बूझो तो जाने?
ये जाड़े की रतियाँ, ये दीपक की बतियां,
ये सर्द हवाएँ, ये महकी फ़िज़ाएँ,
क्या कह रही है बूझों तो जाने?
चंदा को शिद्दत से तकती चकोरी,
आँखों में मेरे गुलाबी सी डोरी,
क्या कह रही है बूझो तो जाने?
न बूझो तो पूछो ये दिल कहेगा।
पुकारोगे तुम तो चुप ना रहेगा।।
तेरे बिन कुछ भी गवारा नहीं है,
पल की जुदाई भी सह ना सकेगा।
—दीपक जैन- निर्मल—