शिव भक्त
आर 0 के0 लाल
एक शिव भक्त को दुखी देख कर पार्वती जी ने पूछा - "भगवन आपका यह पुजारी इतना गरीब और असहाय क्यों है?"
भगवान बोले- " प्रिय! यह व्यक्ति कुछ करना ही नहीं चाहता। भाग्य भरोसे पड़ा रहता है। इसे कुछ भी दिया जाएगा तो उसका उपयोग नहीं कर पाएगा।'
पार्वती जी ने कहा कि ¹ऐसा नहीं है आप इसे कुछ दीजिए तो।
भगवान ने कहा अच्छा और उन्होंने उस व्यक्ति के रास्ते के एक जगह ढेर सारे हीरे जवाहरात फेंक दिए।
तभी उस आदमी को एक अंधा आदमी दिखाई पड़ा जो डंडे के सहारे चल रहा था। उसके मन में ख्याल आया कि कहीं मैं भी अंधा हो गया तो कैसे चल पाऊंगा। यह समझने के लिए वह आंख बंद करके चलने लगा और उस जगह को पार कर गया जहां भगवान ने हीरे जवाहरात फेंके थे। उन पर पैर पड़ने पर उसने सोचा कि कंकड़ होंगे और आगे बढ़ता रहा।
भगवान ने कहा जो सजग होकर नहीं चलेगा वह कोई फायदा नहीं उठा सकता। जीवन पथ में बहुत से कीमती अवसर बिखरे पड़े होते हैं मगर कर्म विहीन प्राणी कुछ नहीं पाता।