जिंदगी ये मेरी जज़बातों सी मगर, बे नमी बंजर सी अहसासों सी जिधर ।
इधर सिर्फ तेरा एहसाह खुशनुमा, लगे जैसे बंजारी में भी है कुछ बात मेहरुमा ।
अब के मिलो तो मिलना शायरी सा बन के, जिंदा रहना मेरे अल्फाज़ो में लिपटके ।
कई सालों तक चलेगी ये बात लफ़ज़ाना, तुझे कितना चाहते है वो एक याद रूहाना ।।
#एक याद By
-शून्य सा