अम्मा मोर नउँवा लिखाय देव ।
हमहूँ स्कूलै जइबय ।
काकू के लरिके दुइव जात हैं ।
कहैं जे पढ़ै न उ ही बिलात है ।
जिनगी म ढ़ंग से जियत न खात हैं।
हम पढ़ि लिखि कय अइबय ।।
पढ़ै लिखै कय बात है अउरै ।
दुई जन आगे पाछे दउरैं ।
बिनु गियान मनही मन भउरैं ।
हमहूँ गियान धन लइबय ।
सब स्कूलै म होत है पढ़ाई ।
कापी किताब मुफत मिलि जाई ।
जूता बस्ता भी मुफतै मा पाई ।
दोपहर कय भोजन भी पइबय ।
ज्ञान कय कीमत कोउ न देवै।
मुफतै मा सब शिक्षा लेवै ।
ई सरकार जे सबका सेवै ।
गियान गंगा मा हमहूँ नहइबय ।
हे अम्मा मोर नउँवा लिखाय देव।