प्यासी धरती के ओठों की प्यास बुझाने आए हैं ।
कृषकों की जीवन दीप शिखातेज जलाने आए है।
ताल तलैया में भी हम उत्साह जगाने आए हैं ।
नदियों को नीरधि जैसा एहसास दिलाने आए हैं।
मेरी गर्जना बोध करती होने का जीवन्त मेरे ।
बूँदे कहती हो एकत्रित बनना है जलधार मुझे ।
तीव्र तरंगें विद्युत की स्पष्ट दृष्टि देती मुझको।
आशाओं पर खरा उतरना करना है स्वीकार मुझे ।