बला हो खूबसूरत हो, इनायत हो कयामत हो।
बड़े मगरूर हो जालिम, वफा की बात करते हो।।
चलाते हो नफासत से, दिलों पर प्यार का खंजर।
चलाकर नैन का जादू, दिलों पर राज करते हो।।
उतर जाते हो नस-नस में, सुबह की रश्मियाँ बनकर।
चटकती हर कली में, सबनमी सा रंग भरते हो।।
करती हैं कहर बरपा, तेरी ए सरबती आँखें।
बड़ा मुश्किल सँभलना, जब जिया पर वार करते हो।।
हवाओं में घुली खुश्बू सी, जब आते हो पहलू में।
लरजते हो मचलते हो, शिकायत खूब करते हो।।
उफनती धार नदिया सी, कमर जब लोच देते हो।
न बचता होश बाकी, जब नैन का वार करते हो।।
पलों में लूट लेते हो, पता भी चल नहीं पाता।
कहाँ कुछ होश रहता है, अजब मदहोश करते हो।।
कभी बनकर घटा सावन की, छा जाते हो शाहिल पे।
उमंगों पर गिरा बिजली, हया की बात करते हो।।
Kuber Mishra