जय श्रीकृष्ण
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चाहता हूँ मैं सदा ही जीव मुझको जान ले
कुछ कठिन नहीं है दृढ़ प्रतिज्ञ हो जो ठान ले
एक निष्ठ ब्रह्म हूँ मैं कृष्ण वासुदेव हूँ
पितामहा अनन्त विष्णु शम्भु आदि देव हूँ
इस जगत का मैं ही एक सर्व श्रेष्ठ सत्य हूँ
जल का स्वाद सूर्य चन्द्र का प्रकाश नित्य हूँ
मन्त्र ओंकार हूँ और व्योम का निनाद हूँ
अग्नि की हूँ ऊष्मा सुगंध भूमि आद्य हूँ
सामर्थ्य हूँ मनुष्य का तपस्वियों के तप सभी
समस्त जीव जिन्दगी हूँ आदि बीज हूँ सभी
बुद्धिमान बुद्धि हूँ समस्त शक्ति तेज हूँ
कामना रहित बलिष्ठ बल जगत सतेज हूँ
सतो रजो तमो गुणों की एक मात्र शक्ति हूँ
मैं ही एक ईश ईश की अनन्य भक्ति हूँ
घर्मयुक्त काम हूँ स्वतन्त्र सब गुणों से हूँ
सर्व शक्तिमान हूँ पृथक प्रकृति क्षणों से हूँ
तीनताप से ग्रसित जगत हुआ है मोहग्रस्त
त्रिगुण शक्ति ही मेरी जो कर रही है उदय अस्त
शरण में आ गया मेरी जो वह त्रयो से पार है
मनुष्य हो या यक्ष देव बाकी सब की हार है
बुद्धिहीन मूर्ख के लिए सदा अदृश्य हूँ
उन्हें पता नहीं कि मैं अजन्म व अनष्ट हूँ
भविष्य भूत वर्तमान मुझसे कुछ छिपा नहीं
सभी को जानता हूँ जीव मुझको जानता नही
भगवत् गीता संगीत से
Kuber Mishra