बीमार पड़ना कोई चाहता नहीं
डाक्टर की जेब भरना कोई मांगता नहीं
दवादारू की इच्छा कोई करता नहीं
बेडपर सोये रहना कोई चाहता नहीं
बहाने फिर भी मिल जाये हजारों
बीमारी का बहाना रास आता नहीं
सच्ची बीमारी से कौन चूका है
बहाना वक़्त बदलते झूठा है
मन मे विचार सच्चे लाऊ
तन को सेहतमंद बनाऊ
क्यों झूठमूठ बीमार पडू
क्यों खुद की नजर मे पडू
रुकती है जिंदगी बीमार पड़नेसे
थमती है प्रगति बीमार होने से
आलस प्रगति रोधक है
बहाना कहाँसे बोधक है
मैं जानता हूँ, आपभी जानो
अपने आपको पहचानो
योग, वर्जिस से बनो तंदुरुस्त
खुद खुश रहो, दूसरों को रखो खुश