" हनुमान जी और मन "
मर्कट जैसा मन मेरा,
कैसे मैं समझाऊं,
सोच सोच के मैं यहां,
बहुत ही घबराऊं,
आज शनिवार के दिन,
हनुमान जी का दर्शन करने जाऊं,
मन को स्थिर करने मैं,
ईश्वर का गुणगान गाउं,
राम जैसे भगवान मेरे,
हनुमान जी को पुरा,
न जान पाऊ ,
तुलसी रामायण को,
पढ़ के मैं,
भक्ति को जान पाऊ,
हनुमान चालीसा पढ कर,
विचलित मन शांत कर पाऊं,
भक्त और भगवान की कथा,
बार बार सुन ने जाऊं, .............. कौशिक दवे का भक्ति भाव भरा जय श्री राम????जय बजरंगबली????