अब शाम का इन्तजार नहीं,
हर दिन अंधेरा छाया हैं.....
अरमां लेके पढते बच्चे,
कल नया सवेरा देखेंगे,
जानते ना थे रात की आग में
कूदेंगे या जल जायेंगे,
घटना देखो ये नवीन नहीं,
फिर लौट "विकास" जो आया हैं,
अब शाम का इन्तजार नहीं,
हर दिन अंधेरा छाया हैं..... ____________(1)
ढोंगी नौटंकी कर - कर के ,
बन जाते हैं वह नामवर,
बदनाम होते क्या नाम ना होगा ?
चल बन जाते हैं जानवर,
"देवायत बानी" सच ठहरी,
"भवैयो" का जमाना आया हैं,
अब शाम का इन्तजार नहीं,
हर दिन अंधेरा छाया हैं..... ____________(2)
केसरी हिंदू का , हरा मुस्लिम का,
रंग बाँट दिया है तिरंगे का,
शांति निर्देशक रंग सफेद जो
रहा नहीं किसी मतलब का,
"सेकुलर-हिन्दू राष्ट्र" ने मिल के,
कोहनी पर गुड़ चिपकाया हैं,
अब शाम का इन्तजार नहीं,
हर दिन अंधेरा छाया हैं..... ____________(3)
~Danbapu