हमने अपना दिल दिया आपको अपना समझकर
आपने उसे तोड़ दिया एक सपना समझकर
आप तो खिलौना समझकर खेल गए
हम कैसे संभाले जब टुकड़े हजार हुए
हम कचरा समझके भी उसे निकाल ना सके
हरेक टुकड़े में आपको ही निहार ने लगे
अभी तक नही मिला कोई मरहम
आप ही बता दो उसे कैसे जोड़ें अब हम