मोहब्बत में जो पड़ा उसने कुछ दर्द जरूर सहा है
तभी शायद हमेशा से मोहब्बत का नाम बदनाम ही रहा है
तू है तो मैं हूं, तू नहीं तो मैं नहीं यह मत समझना |
दूसरा पन्ना थी मेरी जिंदगी की किताब का तू
जो पलट रहा हूं मैं
अब मंज़िल बदल ली है मैंने
तेरे लिए लिख रहा हूं इस भ्रम में मत जीना
अब तुझसे बेहतर की तलाश में आगे बढ़ रहा हूं।