दुआ से मिलता है न बंदगी से मिलता है,
तजुर्बा तो सिर्फ ज़िन्दगी से मिलता है।
लोगों को प्यार अपना सब से मिलता है,
मुझको ही क्यों ऐसे खानगी से मिलता है।
प्यारी हो कर मुझको रोज़ रुलाती है,
चैन फिरभी दिल को उसी से मिलता है।
हरपल साथ हूँ दर्द उठाने के लिए,
फिरभी वो तो खोफगी से मिलता है।
बिगड़ी बाजी सुधर जाएगी "पागल",
निस्वार्थ भाव जो त्यागी से मिलता है।
✍?"पागल"✍?