टूटी हजार बार
लाख असंख्य बार
बार-बार
धान का पौधा जो ठहरी
टोकरी में बटोरना
भिगोना
अंकुरित करना
पर कहीं भी रोपना
सोहना
निराना
सिंचना
पाटना
पिटना
गाहना
काटना और फिर
भेज देना संसार के जंजाल में
फिर हर पडाव पर सवाल
जवाब चार कांधों पर
श्रेय पुरूष समाज
यही बेटी का आज
.....#अनामिका