दुनिया के हसीं नज़ारों का ख़्याल आता है,
आशा के उड़ते गुब्बारों का ख़्याल आता है।
दिल पे अंबार है अनकही तमन्नाओं का,
आज टूटे हुए तारों का ख़्याल आता है।
मेला है परेशानी में छोटी सी उम्मीदों का,
पतझड़ में ही बहारों का ख़्याल आता है।
पाँव भी थक के रह जाते है मायूसी में,
परेशान राहगुज़ारों का ख़्याल आता है।
जहाँ के अनजान शायरों की महफ़िल में,
"पागल" को इश्तहारों का ख़्याल आता है।
✍?"पागल"✍?