लोग यू बिछ्डते है
मोहब्बत के समंदर मे
अकेला छोडते है
यादो के साये मे छोड़
रास्तो मे दिल तोडते है
जाम ए मोहब्बत बनकर
मयखाने मे हमसे मुँह मोड़ते है
मोहब्बत के नाम पर हर
बार नया दिल खोजते है
बिन कहे ही हमसे
सारे नाते न जाने क्यों तोडते है
और फ़िर गम ए मोहब्बत मे
हमे शायर बनाकर ही छोड़ते है