" इस बेला में "
बीती रातें परियों वाली
अब वक़्त गुजरता जाता है,
निर्जन पथ पर आते - जाते
जाने वो कौन बुलाता है?
मधुर - मधुर सा ख्वाब जगा
पलकों से नींद चुराता है,
निर्जन पथ पर आते - जाते
जाने वो कौन बुलाता है?
बादल बनकर उसर मन पर
वह प्रेम सुधा बरसता हैं
निर्जन पथ पर आते - जाते
जाने वो कौन बुलाता है?
इक मतवाला -सा आह सदा
छूकर मन को खो जाता है
निर्जन पथ पर आते - जाते
जाने वो कौन बुलाता है?
युगों युगों से बंद द्वार को
अब कौन खोलने आता है
निर्जन पथ पर आते - जाते
जाने वो कौन बुलाता है?
जीवन की इस वेला में
वह गीत पुरानी गाता है
निर्जन पथ पर आते - जाते
जाने वो कौन बुलाता है?
इस नील गगन के बीच कहीं
वह देख मुझे मुस्काता है
निर्जन पथ पर आते - जाते
जाने वो कौन बुलाता है?
मेरे मन के इस उपवन को
नव कलियों सा महकता है
निर्जन पथ पर आते - जाते
जाने वो कौन बुलाता है?