लब ख़ामोश हैं तो क्या सीने में बवंडर नही रहता
जो जितना अंदर है उतना बाहर नही रहता
मिल ही जाती हैं किसी मोड़ पर तो मंजिलें
जिंदगी में जिंदगी भर तो सफर नही रहता
हर बार हमारी गज़लों में आप हों जरूरी नही
ताउम्र तो किसी चेहरे का असर नही रहता
मुस्कुराते हुए चेहरों से धोखा ना खाइये
यहाँ कोई नही जिसकी आँख में समंदर नही रहता