. *●|| हृदयस्पर्श ||●*
जब तक चलेगी *जिंदगी* की सांसे,
कहीं प्यार कहीं *टकराव* मिलेगा ।
कहीं बनेंगे संबंध *अंतर्मन* से तो,
कहीं *आत्मीयता* का अभाव मिलेगा
कहीं मिलेगी जिंदगी में *प्रशंसा* तो,
कहीं नाराजगियों का *बहाव* मिलेगा
कहीं मिलेगी सच्चे मन से *दुआ* तो,
कहीं भावनाओं में *दुर्भाव* मिलेगा ।
कहीं बनेंगे पराए *रिश्तें* भी अपने तो
कहीं अपनों से ही *खिंचाव* मिलेगा ।
कहीं होगी *खुशामदें* चेहरे पर तो,
कहीं पीठ पे बुराई का *घाव* मिलेगा।
तू चलाचल राही अपने *कर्मपथ* पे,
जैसा तेरा भाव वैसा *प्रभाव* मिलेगा।
रख स्वभाव में शुद्धता का *"स्पर्श"* तू,
अवश्य जिंदगी का *पड़ाव* मिलेगा??