सृजनात्मकता के लिए
आर 0 के 0 लाल
प्रत्येक व्यक्ति में सृजनात्मक होने की क्षमता होती है परंतु दुर्भाग्य की बात है कि अधिकांश लोग अपनी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं करते।
किसी के नए अटपटे सुझाव पर यदि विचार किया जाए तो हो सकता है कि आगे चलकर अनेकों तरह के विचार के रास्ते खुल जाएं, परंतु प्रारंभ में ही इसको नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसी कारण शायद नए उपाय बताने से लोग कतराते हैं।
लोग अक्सर नया विचार इसलिए भी नहीं देते क्योंकि उन्हें भय रहता है कि कहीं वह बात असफल न हो जाए। नए प्रवर्तनीय विचारों पर लोग मजाक कर सकते हैं। इसी डर से अनेक लोग अपने विचार प्रस्तुत करने में हिचकिचाते हैं, हालांकि उनके मन में अक्सर नई बातें आती रहती हैं।
महत्वपूर्ण एवं बड़ी समस्याओं का सामना करते हुए लोग अक्सर तय नहीं कर पाते कि वास्तव में उसके निदान कर भी पाएंगे अथवा नहीं। वह अपनी योग्यता पर ही शक करने लगते है। इसलिए वे पूरी तन्मयता से काम नहीं कर पाते।
सृजनात्मकता एक मानसिक प्रक्रिया है जो इस बात पर निर्भर होती है कि कितने ज्ञान का उपयोग करते हुए किसी समस्या पर कार्य किया जा रहा है और उपलब्ध जानकारी का किस प्रकार इस्तेमाल किया जा रहा है।