अजीब लगता है जब ,
अपना रुलाता है तब,
जीसे बेपनाह प्यार करते थे,
दिल हमारा छीन गए खुद से.
बातें तो अपने जैसी कर रहे थे,
पल भर मैं छोड गए मुस्कुराते हुए.
हम ख़्वाब मैं देखते थे जीसको,
वो खाब की हकीक़त बता गए.
दुश्मन कोई अपना होता है,
जो हमको अपना अपना बोल के,
लत लगाकर उनकी फना कर जाते है.
वो मजा भी क्या था,
दिवानगी का जीसमे दो दिल,
दो दिल तरसे थे एकदुजे के लिए,
अब रुह कांपती है इश्क शब्द सुनकर.
वादा आप कर गए जनाब साहब,
हम तो सब्र का जाम पी पी के दिवाना हो गए,
प्यार हमने किया था बड़े जोश के साथ,
भुलकर भी आपको भुल न पाये,
आपकी यादें हमको सोने नहीं देती,
पलके हमारे रोती है जब नाम आपका लब्जों
पें आता है तो.
अजीब लोग होते है,पहेले प्यार मैं डुबाते है,
बाद हमको मार देते है यादो मैं उनकी,
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