१०८
108 बस इतना ही तो डायल करना पडता है।
जब कभी मेरे अपने खस्ता हालत मे होते है, उनका दर्द देखकर यही खयाल आता है, एमब्युलन्स बुलालू।
लेकिन पता है यह तीन अंक का नंबर डायल करने मे हमे हजार बार सोचना पडता है।
कभी भावुक होकर कोई डायल भी करदेता है तो कोई फायदा नही होता।
क्योकि हम गरीबो के लीए पहले तो कोई १०८ आती नही और गलती से कोई आभी जाए तो हमारी गलीया इतनी तंग होती है की १०८ जोपडी तक आते-आते गरीब अपना दम तोड देया है।
-रेरा