रिश्ते ..इतने प्यारे क्यों लगते हैं ?? कभी एक दम अपने से कभी एक दम अजनबी से / कभी प्यार भी बहुत आता हैं / कभी गुस्सा भी बहुत ....फिर अपने तो अपने ही रिश्ते होते हैं ......जितनी भी नाराजगी हो .एक बार प्यार से आवाज सुनाई / दे एक बार कोई स्नेह से सर पर हाथ रख दे / एक बार कोई मीठा सा डांट दे ..दिल फिर से उनका होकर भीग जाता हैं मीठी मीठी बारिश में कभी आंसू की बारिश पश्चाताप की होती हैं तो कभी फिर से जुडाव की .........पर जब कोई रिश्ता रेट की तरह फिसला रहा हो?मुठ्ठी से तो ????
..............मेरे हाथ से फिसल रहा हैं मेरी जिन्दगी का एक रिश्ता ....... वोह रिश्ता जो इंसानों ने नही भगवन ने बनाया था मेरे लिय ...... लेकिन मैं भी तेरी ही बनायीं हूँ भगवान् .इतनी जल्दी अपनी मुठ्ठी नही खोल्लोंगी .. भरसक कोशिश करूंगी तेरे इस
निविया