#काव्योत्सव के लिए
भावनात्मक कविता
पिता
************
घर का आधार स्तंभ पिता
परिवार का सहारा होता है।
स्वयं धूप में जलता निशदिन
परिजन को देता शीतल छांव हैं।
ऊपर से सख्त कठोर दिखता पिता
पर दिल के अंदर प्रेम का झरना बहता है।
देने संतान को हर सुख साधन
दिन रात मेहनत करता रहता है।
स्वयं गुजारा कम में करता पर
संतान को हर सुविधा देता है।
संतान सफल हो जग में नाम कमाए
भरसक कोशिश करता रहता है।
संतान के दुख में आंसू न बहाए पर
पिता दिल ही दिल में रोता है ।
मां सम ममता नहीं जताता पर
प्रेम पिता भी कम नहीं करता है।
संतान को जो सब कुछ देता है
हां वह पिता ही होता है।
*अर्चना राय भेड़ाघाट जबलपुर मध्य प्रदेश*