दोस्तों कल mothers day पर लिखित मेरी रचना...
ईश्वर का स्वरूप ममता की छाव होती हे माँ
बेटे पर सब कुछ लुटाती फिर भी धनवान होती हे माँ
कर्जदान रहना चाहते है हम जिसके
वह चोडी छाती वाली होती है माँ
गीले में सोकर खुद बेटे को सुलाती सूखे में
ऐसी ममता की मूरत होती है माँ
वार दे एक इच्छा पर सब कुछ अपना
बलिदान का पर्याय होती है माँ
दुख कभी न टकराए हमशे ऐसी जिसकी कामना
दुख में सुख का अनुभव कराती ऐसी होती है माँ
जन्नत को कहा ढूंढते हो धर धर भटके
बैठो माँ की बाहों में खुद जन्नत ही होती है माँ
-प्रमोद बम्मानिया