#kavyotsav2
विषय : प्रेम (गीत)
कुछ पल संग-संग चलकर, हमसफर बने रहना ।
पथ के साथी बनकर हमराही मेरे चलना ।
ख्वावों मे बसे रहना ।
यादों में सजे रहना ।
पथ के साथी बनकर ...
बल खाते जीवन की, टूटी हैं सब कड़ियां ।
आ जाओ गुलशन में, खिल जाएँ फिर कलियाँ ।
पलकों में छुपे रहना ।
रग-रग में बसे रहना ।
जब अपना ही मान लिया, अपने ही बने रहना । पथ के साथी बनकर...
इतना तो जरा समझो, ये जीवन है तेरा ।
सानिध्य तनिक पाने, मन विहवल है मेरा ।
हर मोड़ पै आ जाना ।
रस्ता भी दिखा जाना ।
जब-जब पग डगमग हों, गिरने से बचा लेना । पथ के साथी बनकर...
उलझा- उलझा जीवन, तुम आकर सुलझाओ ।
प्यासा-प्यासा सा मन, रस प्रेम पिला जाओ ।
मन को भी खिला देना ।
तन को भी खिला देना ।
जो मिल न सके थे पल, वो फिर से मिला देना । पथ के साथी बनकर...
कुछ पल संग-संग चलकर, हमसफर बने रहना ।
पथ के साथी बनकर हमराही मेरे चलना ।
- उदय