kavyotsv 2
स्वरचित
भुला न पाया तुमको
बड़ी मुश्किल से हमने भुलाया तुमको
पर हर बार कहीं न कहीं पाया तुमको।
भोर की बेला में साँझ की सरसराहट में
ख्वाबों में डूबी हुई एक हल्की सी आहट में।
यादों की धुँधली तस्वीर में सजाया तुमको।
पर हर बार कहीं न कहीं पाया तुमको।।
पेड़ों की झुरमुट में दरिया की लहरों में
बागों ने लगाये जो उन खुशबुओं के पहरों में।
भौरों ने भी अपनी धुन में कई बार गाया तुमको
पर हर बार कहीं न कहीं पाया तुमको।
अल्लाह की पूजा में ईश्वर के सज़दे में
अपनी हर साँस के झीने से पर्दे में।
न चाह कर भी हमेशा ही बसाया तुमको।
पर हर बार कहीं न कहीं पाया तुमको।।
हम तो इसी भरम में जीते रहे उम्र भर
कि तुमको भुला दिया हमने सब्र कर।
ये अलग बात है कि कभी भी न भुला पाया तुमको।
पर हर बार कहीं न कहीं पाया तुमको।।
बड़ी मुश्किल से हमने भुलाया तुमको।।
जमीला खातून
सर्वाधिकार सुरक्षित।