kavyotshav2 स्व रचित
छेड़ दो मन वीणा के तार
छेड़ दो मन वीना के तार
मधुर संगीत बिखर जाये।
बदहाल उदास फिजाओं में
मीठे गीत बिखर जाएँ।छेड़ दो..
बुरे ख्याल की जगह दिलों में
भर जाये प्रेम की मीठी धुन।
कर्कश करुणा क्रंदन के स्वर
मीठे गीतों में बदल जाएँ।।छेड़ दो...।
हर चेहरे पर मुस्कान रहे
बागों में कलियाँ खिल जाएँ।
गुनगुन गुन गुन भौंरा गाये
खुशबू हर और बिखर जाये।।
छेड़ दो...।
अमन चैन की वंशी की धुन
गूंजे हर और फिजाओं में।
जो दर्दे दिल की दवा बने
ऐसा मनमीत नजर आये।।
छेड़ दो....।
सिसके न बचपन गलियों में
कोई बेटी न छली जाये।
फूलों से महकें नोनिहाल
किलकारी हर और नजर आये।
छेड़ दो मन वीणा तार......।
जमीला खातून
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