#काव्योत्सव2 #કાવ્યોત્સવ2
केंडल जलाने से कुछ नही होगा क्रांति की मशाल जलानी होगी,
इंसान को हिन्दू मुस्लिम में बाँटने वालो में इंसानियत जगानी होगी।
बेटी चाहे किसीकी भी हो उसको इज्जत देनी होगी,
बलात्कारी चाहे कोई भी हो उसको मौत देनी होगी।
कब तक भागोगे देशके मसलों से बनके मौनी बाबा,
शेर कहेते हो खुदको तो पंजा उठाकर दहाड़ लगानी होगी।
शब्द नही कोई दूजा पंजा बोल दिया है मैंने देशभक्तो बुरा मत मानना,
ठोस कदम नही उठाया तो छप्पन की छाती पे ब्रा पहेननी होगी।
कब तक करोगे बेइज्जत माँ बेटी बहेनो को कोर्ट में,
एक कोर्ट से दूसरी नही, जज को पेनकी निब तोड़नी होगी।
सच्चाई से मुंह फेरोगे कब तक?अच्छा है हमसे साउदी अरब,
पट्टियां खोलके आंखोकी जिगर से नई गीता कुरान लिखनी होगी।
-जिगर बुंदेला